गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों के सब्र का बांध बुधवार को आखिर टूट गया। पिछले नौ महीनों से व...
गाजीपुर (ब्यूरो)। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों के सब्र का बांध बुधवार को आखिर टूट गया। पिछले नौ महीनों से वेतन की बाट जोह रहे दर्जनों कर्मचारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई और एक सामूहिक प्रार्थना पत्र सौंपकर अपनी बदहाली बयां की। 'सिल्कॉन बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड' (SILKON BUSINESS PVT LTD) नामक एजेंसी के माध्यम से कार्यरत इन कर्मियों ने आरोप लगाया कि वेतन न मिलने से उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है और वे पूरी तरह कर्ज के दलदल में धंस चुके हैं।
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| Purvanchal Samachar |
सीएमओ की 'अनदेखी' और ईपीएफ का 'घपला'
कर्मचारियों का आक्रोश केवल वेतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि इस बाबत 30 मार्च 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को भी लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन नतीजा 'ढाक के तीन पात' ही रहा। आरोप है कि कंपनी न केवल वेतन डकार रही है, बल्कि पिछले एक साल से कर्मचारियों का ईपीएफ (EPF) भी जमा नहीं किया गया है। अधिकारियों की इस चुप्पी और एजेंसी की मनमानी ने कर्मचारियों को मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़कर रख दिया है।
चेतावनी: समाधान नहीं तो होगा आंदोलन
डीएम दरबार में पहुंचे पीड़ित कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनके लंबित वेतन का भुगतान और दोषी एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। कर्मचारियों ने कहा कि वे अब श्रम विभाग और उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाने के साथ-साथ जनसंचार माध्यमों के जरिए अपने हक की लड़ाई को सड़कों पर ले जाने के लिए बाध्य होंगे।
